रविवार, अप्रैल 26, 2009

My Village - Gugalwa ( Guglwa Kirtan)








My village is situated in Tehshil Sadulpur of District Churu of Rajasthan (India). It name is Gugalwa (Guglwa Kirtan). It is 3 km from Rampura Beri or 23 Kms from PILANI and 1 kms from Railway Station ( Guglwa-Kirtan) . Pilani is small town, situated on Sadulpur-Sikar-Jhujnjhunu national highway. It is famous for BITS. About my village, it is not associated with any historical event; however it is unique in many ways. It is important to me because my lots of memories are associated with this.

This is a small village with 300-350 houses, which includes the 40 houses of (Rajputs) and 30 houses of Jat's and rest houses from the others castes. Though it is small village, but it is unique in its structure. Here everybody is dependable on each other. Most of the lands are owned by the Rajput's,Jat's (Upper Casts) approximately about 80%. . In this unique way all castes are totally dependable on each other. Nobody can survive without the help of other. Second unique thing about my village is its water system. This area is prone for water shortage. But the elders of village have very wisely constructed a small Water Supply House and its supply from 3 to 20 km away to the other villages. This supply system was made by the government.

People talks from km away can be heard. In cities, we will ever get this opportunity. Here one can hear nature talking to him and see lot of miracles of nature. I invite people to explore the beauty of my village and Rajasthan . You will really like this for your life.
Rajput's

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3 टिप्‍पणियां:

  1. टूटी नहर की मरम्मत शुरू, चेहरे खिले
    Monday, 20 Feb 2012 11:19:14 hrs IST


    सिधमुख। जिले के बड़े इलाके की सिंचाई का आधार कही जाने वाली सिधमुख नहर के बार-बार टूटने व घटिया निर्माण की खामियों से अब किसानों को निजात मिल सकेगी।यहीं नहीं पिछले दिनों टूटी नहर की मरम्मत के लिए टालमटोल की सरकारी नीति के कारण अटका पड़ा नहर मरम्मत का कार्य भी रविवार को शुरू हो गया।

    गौरतलब है कि घटिया निर्माण के चलते गांव भानगढ़ व झिलोदा के मध्य करीब एक माह पूर्व नहर के टूट जाने से किसान परेशान थे।किसानों की इस परेशानी को भामाशाह हरिसिंह चाहर ने करीबी से देखा और किसानों के बीच पिछले दिनों अपने बूते ही नहर के मरम्मत की घोषणा कर डाली।

    भानगढ़ के सरपंच धर्मसिंह भाम्भू की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में भामाशाह हरिसिंह चाहर ने नहर मरम्मत कार्य का शिलान्यास किया। नहर की मरम्मत का कार्य शुरू होते ही एक माह से नहर मरम्मत का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरे खिल उठे। चाहर ने कहा कि वो क्षेत्र में पीने के लिए खारा पानी, गर्मी में लू के थपेड़े, सर्दियों में हाड़ कंपकंपा देने वाली सर्दी में किसान की परिस्थितियों को समझते हैं।

    उन्होंने कहा कि जब नहर के अंतिम छोर तक पानी नहीं आ जाता तक तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। चाहर टीम के प्रवक्ता रणसिंह गागड़वास ने जनप्रतिनिघियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा सिंचाई विभाग के अघिकारियों की ओर से टूटी नहर की मरम्मत के लिए बजट का अभाव बताया जाना जनप्रतिनिघियों की कमजोरी है। इस मौके पर सरपंच शुभराम, जगत सिंह पूनियां, मेवा सिंह चाहर, विजय सिंह, जयप्रकाश रेडू, सुशील कुमार, सुभाष नायक, राजेन्द्र सिहाग, रतनसिंह धुवां सहित ग्रामीणों ने चाहर का अभिनन्दन किया।

    दो दिन में होगा निर्माण
    भामाशाह हरिसिंह चाहर के आर्थिक सहयोग से शुरू हुआ निर्माण कार्य दो दिनों में पूरा हो जाएगा। नहर में भराव का का कार्य किसान पूर्व में ही कर चुके है। रविवार से सात मिस्त्री, एक दर्जन से ज्यादा मजदूर एवं अनेक किसानों ने टूटी नहर का मरम्मत करने में जी जान से जुटे हैं। टूटी नहर की मरम्मत पर कई लाख रूपए खर्च होंगे। बजट के अभाव में एक माह से नहर टूटी होने के कारण नहर में पानी की आवक बंद थी। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिघि एवं सिंचाई विभाग के अघिकारी चुप्पी साधे हुए थे।

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  2. आज देश की जनता ऐसे समाज सेवकों से ही आशा कर सकती है , वरना राजनेताओं के सहारें की उम्मीद रखना तो बेमानी है .
    हरी सिंह जैसे समाजहित में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले बिरले ही हैं.

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    1. सूखी नहर में आया पानी

      सिधमुख। एक माह पहले 26 जनवरी को भादरा तहसील के गांव भानगढ़- झिलोदा के मध्य घटिया निर्माण के कारण पानी का प्रवाह नहीं सह पाने से टूटी सिधमुख नहर का करीब तीस मीटर हिस्से की मरम्मत के बाद पानी छोड़े जाने से इलाके के किसान आल्हादित हैं।

      गौरतलब है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नहर टूटने का कारण चूहे और सांपों के बिल होना बताया था। विभाग की ओर से टूटी नहर की मरम्मत के लिए बजट का अभाव बताते ही नहर के पानी से अच्छी फसल पैदा करने की उम्मीद लगाए क्षेत्र के किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया था।

      रंग लाई भामाशाह चाहर की पहल
      क्षेत्र के हजारों किसानों की उम्मीद को अंजाम तक पहुंचाया समाज सेवी भामासाह हरिसिंह चाहर की चाह ने। चाहर के आर्थिक सहयोग से टूटी नहर की मरम्मत करवाने के बाद हनुमानगढ़ जिले के भिराणी हैड से सोमवार शाम छह बजे छोड़ा गया पानी मंगलवार सुबह सात बजे भीमसाणा व नौ बजे राजपुरिया पहुंचा तो किसानों के चेहरे खिल उठे। वर्षो से नहर के पानी से खेतों में फसल पैदा करने की आस लगाए बैठे किसानों की उम्मीद के पंख लग गए।

      जताया आभार
      मंगलवार सुबह भामाशाह हरिसिंह चाहर की टीम के मेवासिंह चाहर, करणी सिंह, रणसिंह गागड़वास, उप सरपंच प्रधान ढाका, हीरालाल जांगिड़, ओमप्रकाश ने नहर का निरीक्षण किया तो भानगढ़ के सरपंच धर्मसिंह भांभू, कृषक रतनसिंह धुवां, केसर सिंह, श्रवण कुमार, सतवीर सिंह, नत्थूराम, रणसिंह ढाका, रामसिंह पदार, सूधीराम, दिलीप सिंह अनेक किसानों ने चाहर टीम का आभार जताया। गौरतलब है कि नहर मरम्मत पर तीन लाख से अधिक की राशि खर्च हुई है।

      अखर रही है खालों की कमी
      क्षेत्र के किसान नहर में पानी देख खुशी से सराबोर है लेकिन नहर में खालों की कमी अखर रही है। नहर क्षेत्र में खालों का निर्माण नहीं होने से उन्हें पाइप के माध्यम से दो किलो मीटर दूर तक खेतों में पानी ले जाना पड़ रहा है।

      इनको मिलेगा लाभ
      नहर में पानी आने का सर्वाधिक लाभ गांव गालड़, सिधमुख, रेजड़ी, रामसरा ताल, रामसरा टिब्बा, किशनपुरिसा बास, सादपुरा, टूण्टा खेड़ी, सरदारपुरा, ढाणी बड़ी, छोटी ताम्बाखेड़ी के सैंकड़ों किसानों को मिलेगा।

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