शनिवार, फ़रवरी 19, 2011

परिवर्तन

( Bangalore 19th Feb'2011)


आज वो दोनों एक दुसरे से नजरें चुराकर निकलते हैं और नहीं चाहते की कही आमना सामना हो |
वैसे दोनों सगे भाई हैं मगर समय के अनुसार आज एक दुसरे के प्रतिदवंदी बन गए| कही किसी जगह अगर एक का जिक्र आता है तो दूसरा ऊठ कर चल देता है यानि उसके बारे में कुछ सुनना
भी पसंद नहीं |  ये उन दोनों की कहानी नहीं घर घर की कहानी है और देखा जाये तो ये प्रकृति का नियम है जो आज भी एक रहस्य बना हुवा है की सही में प्रकृति का नियम है या मनुष्य ने बनाकर प्रकृति के नाम लगा दिया |

कभी दोनों भाई साथ खेलते थे , एक दुसरे का बहुत ख्याल रखते थे , उन की एक छोटी बहन थी वो भी अपने दोनों भाईयों के साथ ही रहती थी , साथ रहना, खाना,पीना खेलना सब कुछ एक दुसरे के बिना नहीं करते थे ये उन दिनों की बात है जब वो बच्चे थे मगर आज जवान होने के साथ अपनापन भूल गये | अब कोई इसको बचपना कहेगा या उस बचपन को बचपना कहे ,ये में तो क्या कोई भी नहीं समझ पाएगा | क्या इंसान जब बच्चा होता है तब ज्यादा समझदार होता है या जवान होने के बाद समझदार होता है |

कभी खेलते खेलते एक ही बिस्तर पर तीनो भाई-बहन थक कर सो जाया करते थे और सुबह के आलस में ए क दुसरे से चिपक कर सोने और उठने की कोशिश करते रहते थे ,कोई सोना तो कोई
उठाना चाहता था और इसी तरह फिर से वो खेलने लग जाते |

फिर आज ऐसा क्यों ? किसने उन सभी के बीच में ये अलगाववाद की दिवार खींच दी ? क्यों एक दुसरे से बच कर निकलना चाहते हैं , क्यों उनके दरमियाँ ये इतने फासले हुए और निरंतर बढते ही जा रहे हों | अक्सर हम कहते हैं की दुनिया ने उनके बीच दिवार खड़ी करदी , मगर क्या सचमुच दुनिया ने ऐसा क्या ? नहीं , ये उन लोगो ने खुद क्या , वो जवान होने के साथ साथ अपना विवेक खोते गये और साथ रहने की बजाय अकेले रहना पसंद करने लेगे | बस फर्क इतना है बचपन में खिलोने और मिठाई के लिए लड़ते थे और आज घर और जमीन के लिए |

दोनों अवस्थाओं में हरकतें एक जैसी हैं | तो क्या लड़ना झगड़ना इंसानी फितरत है ? अगर हाँ तो दोनों अवस्थावों के दुवंद में इतना फर्क क्यों ? क्यों आज भी वैसे की झगडा करके कुछ ही पलों में भूल नहीं जाते ?क्यों रंजिश पाल लेता है इंसान अपनों के साथ

" दुश्मनी करो तो जम कर करो मगर ! ये गुंजाइश हो
कि , जब कभी हम दोस्त बन जाएँ तो शर्मिंदा ना हों !

"विक्रम"

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1 टिप्पणी:

  1. "क्यों आज भी वैसे की झगडा करके कुछ ही पलों में भूल नहीं जाते? क्यों रंजिश पाल लेता है इंसान अपनों के साथ" - एक ज्वलंत प्रश्न

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