मंगलवार, जुलाई 26, 2011

(((((((((((((बीस साल बाद )))))))))))





बहुत सालों बाद इस बार में अपने गाँव में लगभग १५ दिन रुका और मुझे इन १५ दिनों में एहसास हो गया की मेरा वो बीस साल पहले वाला गाँव अब गाँव नहीं रहा वो शराबियों और जुवारियों का अड्डा बन गया है



में हर साल अक्सर एक या दो बार एक या दो दिन के लिए जा पाता था मगर इस बार कारणवश मुझे १५ दिन रुकना पड़ा और इन १५ दिनों में मेने १० से लेकर २५ साल के युवाओं को शराब डूबे हुए ही देखा रात तो रात दोपहर में भी शराब के नशे में झूमते,गलियों में गिरते ,एक दुसरे से झगड़ते ,गाली-गलोज करते उनको रोजाना देखा गया ऐसे परिवार के युवा भी नशे में लहराते मिले जिनके घर में एक वक़्त का खाना जुटाना भी मुश्किल है मगर पाता नहीं शराब कैसे जुटा ली जाती है


इन सब के पीछे शराब माफियाओं का हाथ साफ साफ नजर आता है में नहीं मानता ९९% युवा एसे कैसे शराब के आदि हो गए , आज कल ठेके पे मिलने वाली ओरंज शराब में जरुर ऐसा कुछ है जो एक या दो बार पीने से पीने वाले को अपना गुलाम बना लेती है घर घर में ठेके वाले शराब रख देते हैं और फिर परिवार के परिवार बर्बाद कर देते हैं





२० साल पहले मेरे गाँव में गीनती के पीने वाले थे मगर आज गीनती केन पीने वाले हैं अगर वक़्त रहते इसको फैलने से रोका नहीं गया तो ये एक महामारी बनकर युवा पीढ़ी को वक़्त से पहले बुड़ा और बीमार बना देगा हमें हर गाँव में ये एलान करना होगा की कोई भी २० साल से कम उम्र के लड़के को शराब ना बेचे और ना ही पीनेदे , हम इसी उम्र में उनको रोक सकते हैं वरना बाद में बहुत देर हो जाएगी और रोक पाना उतना ही कठिन होगा


"विक्रम"

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2 टिप्‍पणियां:

  1. सबसे पहले आपसे शिकायत.जिस गाँव से आपकी और आपके पुरखों की जड़े जुडी हुई है उसके लिए आपने अब तक कुछ नही किया?
    कर सकते ठे.जहाँ जॉब कर रहे हो वहीँ से कुछ लोगों को जोड़कर बहुत कुछ अब भी कर सकते हो बाबु! मेरा एक आर्टीकल 'गुंडा पार्टी पढ़ना.शायद कोई रास्ता मिल जाए.
    पिछले बाईस सालो से मैं गाँव के स्कूल्स मे टीचिंग जॉब कर रही हूँ.मेरा उन गांवों से पढने तक का संबंध है किन्तु जहाँ रही उस गाँव के लिए खूब काम किये.सडके,एनिकट्स,सामुदायिक भवन,स्कूल भवन,विधवाओं,विकलांगों के लिए पेंशन और भी बहुत कुछ..........
    करने की इच्छा शक्ति हो तो सब संभव है.जबकि आज गाँव अपनी मासूमियत,सादगी खो चुके हैं.नशा,निकम्मापन,प्रपंच्बाजी खूब मिलेगी.क्योंकि ज्यादातर खेती मजदूरी के काम भी औरते करती है.आदमियों को समय ही समय है.
    बहुत खराब स्थिति है.हाँ यह सब करने पर भी आपको सराहना नही मिलने वाली.इन सबकी अपेक्षापरवाह ना करो तो.......... बहुत समय नही बिता है बाबु!

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  2. टिप्पणी और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद इंदु जी , जैसा आपकी प्रोफाइल मे पढ़ा था , आप बिलकूल वैसी ही है , काश हर महिला मे आप जैसी बात हो तो समाज किया देश के हालत भी बेहतर हो सकते हैं .

    उत्तर देंहटाएं

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