शनिवार, मार्च 15, 2014

शब्द

गुजरे वक़्त की,
अलमारियों में
रखी तेरी यादों की
ढेर सी किताबों
में, किसी एक से ,
जब कभी कुछ
शब्द अकुलाकर
सफ़ों से बाहर
आकर मुझसे
मेरे यूँ
बिन बताएं चले
आने का 
सबब पूछते हैं
तो  मैं निरुत्तर-सा
उन शब्दों को
खामोशी से यथास्थान
रख देता हूँ।
विक्रम

Related Post

widgets by blogtips

3 टिप्‍पणियां:

मार्गदर्शन और उत्साह के लिए टिप्पणी बॉक्स हाज़िर है | बिंदास लिखें|
आपका प्रोत्साहन ही आगे लिखने के लिए प्रेरित करेगा |