रविवार, जून 19, 2016

अव्यक्त शब्द


मैं, उम्रभर
तुम्हारे उन अव्यक्त
और अस्पष्टाक्षर शब्दों
के अर्थ तलाशने को ,
शब्द-मीमांसाओं के अंतर-जाल
भेदता रहा .....
कपोल-कल्पनाओं की
आड़ लेकर तलाशता रहा
कुछ समानार्थी शब्द !
शब्दों के उन झंझावातों ने
मतांध बना दिया मुझे ।
उल्लासोन्माद की पराकाष्ठाएं
लांघकर ,
जानना चाहता हूँ अभिप्राय,
तुम्हारे उन
अव्यक्त शब्दों का ....


"विक्रम"
 

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4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 20 जून 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. कुछ अव्यक्त शब्द कई बार समझ तो आते हैं ... पट इंसान समजना चाहता है उन्ही से जो बो गए हैं शब्द ... भावपूर्ण ...

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  3. सच कहा कई बार कुछ बातो के मायने तलाशने में जिन्दगी निकल जाती है ..सार्थक अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं

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