शेखावत बनाम गुगलवा (गाँव)

राव मोकलजी की मृत्यु होने पर स.1502 वि. में बारह वर्ष की अल्पायु मे शेखाजी नाँण और बरवाड़ा के स्वामी बने। उसके बाद राव शेखाजी ने अमरसर बसाकर उसे अपनी राजधानी बनाया। राव शेखाजी के बाद उसने पुत्र रायमल जी गद्दी पर बैठे। रायमल जी के सुजाजी (सुरजमल) हुये ।
 सुरजमल के 6 पुत्र हुये जिनके नाम थे , लूणकरण जी,रायसमल जी , गोपाल जी ,भैरुजी, चांदाजी और रामजी। इनमे भैरुजी के वंशज “भैरुजी के शेखावत” कहलाए।  भैरुजी के 5 पुत्र थे जिनके नाम नरहर दास,कुँवरसाल ,बेरिसाल,सांगा और भारमल थे। इनमे नरहरदास के 18 पुत्र हुये जिनमे कवरसी,कशोदास,राजसी,जगन्नाथ,जसवंत,जगरूप,जैतसी,रायसी ये 8 पुत्र हिसार के नवाब के साथ वि.1679 में लड़ाई मे वीरगति को प्राप्त हुये । बाकी 10 पुत्र थे नाहरखाँ (नाहर सिंह) ,गोरधन,बालदास,किशनसिंह,मुकुन्दसिंह, हरीसिंह,रघुनाथ सिंह,भीमसिंह,रामसिंह और नारायणसिंह।
 इनमे नाहरखाँ (नाहर सिंह) के  चार पुत्र हुये जिनके नाम थे मदन सिंह,शक्ति सिंह,तेजसिंह और विरभानसिंह, इनमे नाहर सिंह के बाद मदन सिंह गद्दी पर बैठे। शक्तिसिंह को बँटवारे मे गुगलवा और बेवड गाँव दिये गए थे ।
 
 
 

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