फुटकर शे'र

तेरी तलब में रहता है आसमां पे दिमाग
तुझको पा गये होते तो जाने कहाँ होते


प्यार उसका हज़ार के नोट जैसा
डर लगता है नकली न हो


-अज्ञात

बहुत थे हमारे भी कभी इस दुनिया में अपने
काम पड़ा दो चार से और हम अकेले हो गए


यूं न झांको गरीब के दिल में
हसरतें बेलिबास रहतीं हैं


सुकून और इश्क, वो भी एक साथ
रहने दो, कोई अक्ल की बात करो


 

चेहरा बता रहा था कि बेचारा मरा है भूख से
सब लोग कह रहे थे कि कुछ खा के मर गया


रिश्वत भी नहीं लेता कम्बख्त जान छोड़ने की,
ये तेरा इश्क तो मुझे केजरीवाल लगता हैं...


बड़ी गुस्ताख है तेरी यादें इन्हें तमीज सिखा दो
दस्तक भी नहीं देती और दिल में उतर आती हैं
-अज्ञात


मुद्दतों बाद ये दस्तक कैसी ?
हो न हो कोई मतलबी होगा


याद करने की हमने हद कर दी मगर
भूल जाने में तुम भी कमाल रखते हो
-अज्ञात


 हुआ है तुझसे बिछडने के बाद अब मालूम
के तू नहीं था, तेरे साथ एक दुनिया थी..


कमबख्त मानता ही नहीं दिल उसे भूलने को
मैं हाथ जोड़ता हूँ तो ये पांव पड़ जाता है


न दिल का रोग था, न यादें थी, और न ही ये हिजर
तेरे प्यार से पहले की नींदें भी कमाल की थी


तुम्हारी याद किसी मुफ़लिस की पूँजी जैसी
जिसे हम साथ रखते हैं, जिसे हम रोज़ गिनते हैं


मौत आए तो दिन फिरें शायद

जिंदगी ने तो मार डाला है .....

लोग सीने में कैद रखते हैं
हमने सर पर चढ़ा लिया दिल को


कैसी गुज़र रही है, सभी पूछते हैं
कैसे गुजारता हूँ, कोई पूछता नहीं


मैंने सुकून के शौक में खोली थी दिल की खिड़कियाँ
तेरी यादों का सारा शोर भीतर आ गया


एहतियातन बुझा सा रहता हूँ
जलता रहता तो राख हो जाता
-अज्ञात


मरहम न सही एक ज़ख्म ही दे दो
महसूस तो हो के कोई हमें भूला नहीं


-जावेद अख्तर

तेरी याद ही आखिरी सहारा थी
बडी भूल की तुझे भूल कर
--अमोल सहारन


कुछ तो फ़राज़ हमने पलटने मे देर की
कुछ उसने इन्तज़ार ज़्यादा नहीं किया


कुछ तो होता है मोहब्बत में जुनून का असर फ़राज़
और कुछ लोग दीवाना बना देते हैं


-अहमद फ़राज़

 
 "सियासत सूरतों पर इस तरह एहसान करती है 
ये आंख्ने छीन लेती है, और चश्में दान करती है"



कुछ रोज तक तो मुझको तेरा इंतजार था
फिर मेरी आरजूओं ने बिस्तर पकड़ लिया



फिर किसी ने लक्ष्मी देवी को ठोकर मार दी 
आज कूड़ेदान मे फिर एक बच्ची मिल गई.....
 
जिसने भी इस खबर को सुना सिर पकड़ लिया
कल एक दिये ने आँधी का कालर पकड़ लिया

-मुन्नवर राणा

 बस दुकान के खोलते ही झूठ सारे बिक गए
एक तन्हा सच लिए में शाम तक बैठा रहा .....


 "परदेसी ने लिखा है जिसमें, लौट न पाऊँगा 
विरहन को उस खत का अक्षर-अक्षर चुभता है "

 "बेटी की अर्थी चुपचाप उठा तो ली
अंदर अंदर लेकिन बाप टूट गया"

 "स्टेशन से वापस आकर बूढ़ी आँखें सोचती हैं
पत्ते देहाती रहते हैं, फल शहरी हो जाते हैं"

 "ग़रीबी क्‍यों हमारे शहर से बाहर नहीं जाती
अमीर-ए-शहर के घर की हर एक शादी बताती है"

 
 कहाँ आसान है पहली मुहब्बत को भुला देना
बहुत मैंने लहू थूका है घरदारी बचाने में
 

ये अमीरे शहर के दरबार का कानून है
जिसने सजदा कर लिया तोहफे में कुर्सी मिल गई

- मुन्नवर राणा

 
ये बात अलग है की खामोश खड़े रहते हैं
फिर भी जो लोग बड़े हैं वो बड़े रहते हैं....

हमारे मुल्क में खादी की बरकते हैं मियां।
चुने चुनाए हुए हैं सारे छटे छटाये हुए...." 


 "उखड़े पड़ते है मेरी कब्र के पत्थर ,हरदिन
तुम जो आजाओ किस दिन तो मरम्मत हो जाए"

 
 "मिलाना चाहा है जब भी इंसान को इंसान से
तो सारे काम सियासत बिगाड़ देती है"


- राहत इंदौरी

 

 
 

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